भारत में मिलेट्स
मिलेट्स सदियों से भारत की कृषि और पाक संस्कृति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ये सूखा-प्रतिरोधी और पोषक तत्वों से भरपूर अनाज—जैसे बाजरा, कांगनी और रागी—पूरे देश में, विशेषकर अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाए जाते हैं। हाल के वर्षों में मिलेट्स की पुनरावृत्ति उनके स्वास्थ्य लाभों और खाद्य असुरक्षा से निपटने की क्षमता के कारण हुई है।
भारत में मिलेट्स क्या हैं?
मिलेट्स अत्यधिक पोषक होते हैं और इनमें प्रोटीन, आहारीय रेशा, खनिज और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं। ये ग्लूटेन-रहित भी होते हैं और इनका ग्लाइसेमिक सूचकांक कम होता है, जिससे ये ग्लूटेन असहिष्णुता या मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बनते हैं। हाल के वर्षों में मिलेट्स में पोषक मूल्य और जलवायु-सहनशील गुणों के कारण नवीनीकृत रुचि देखी गई है।
भारत में मिलेट्स की सूची
| मिलेट प्रकार | हिंदी नाम | खेती का क्षेत्र | पोषण मूल्य | सामान्य उपयोग और व्यंजन |
|---|---|---|---|---|
| पर्ल मिलेट | बाजरा | राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब | फाइबर, प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम में उच्च | रोटी, भाकरी, खिचड़ी, दलिया |
| फिंगर मिलेट | रागी | कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल | कैल्शियम, आयरन, फाइबर और प्रोटीन में उच्च | रागी मुड्डे, डोसा, इडली, दलिया |
| फॉक्सटेल मिलेट | कंगनी/मोटकी | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश | प्रोटीन, फाइबर और तांबे व आयरन जैसे खनिजों में उच्च | उपमा, पोंगल, खीर, पुलाव |
| लिटिल मिलेट | कुटकी | कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड | फाइबर, प्रोटीन और पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे खनिजों से भरपूर | खिचड़ी, पुलाव, उपमा, खीर |
| प्रोसो मिलेट | चीना | उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु | प्रोटीन, फाइबर और आयरन व फॉस्फोरस जैसे खनिजों में उच्च | रोटी, खिचड़ी, खीर, दलिया |
| बार्नयार्ड मिलेट | संवा | उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु | फाइबर, प्रोटीन और कैल्शियम व फॉस्फोरस जैसे खनिजों से भरपूर | खिचड़ी, डोसा, इडली, उपमा |
| कोडो मिलेट | कोदरा | महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना | प्रोटीन, फाइबर और आयरन व कैल्शियम जैसे खनिजों में उच्च | खिचड़ी, पुलाव, उपमा, खीर |
| सॉर्घम मिलेट | ज्वार | महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश | फाइबर, प्रोटीन और फॉस्फोरस व आयरन जैसे खनिजों में उच्च | रोटी, भाकरी, खिचड़ी, दलिया |
भारत में प्रमुख मिलेट कौन-से हैं?
भारत में मिलेट की किस्मों की एक समृद्ध विविधता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
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ज्वार (ज्वार); यह भारत में सबसे अधिक उगाया जाने वाला मिलेट है और इसका उपयोग मानव उपभोग तथा पशु आहार दोनों के लिए किया जाता है। ज्वार सूखा-सहनशील है और खराब मिट्टी में भी उग सकता है।
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बाजरा (बाजरा); यह एक पोषक और सख्त फसल है जो सूखी और गर्म परिस्थितियों में उग सकती है। इसका उपयोग मानव उपभोग और पशु आहार के लिए किया जाता है।
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रागी (रागी); यह कैल्शियम और अन्य खनिजों का एक समृद्ध स्रोत है और इसका उपयोग दलिया, रोटी और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।
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कंगनी (कंगनी); यह सूखा-सहनशील फसल है जिसका उपयोग रोटी, उपमा और अन्य व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।
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कुटकी (कुटकी); यह एक छोटे दाने वाला मिलेट है जो फाइबर और प्रोटीन से भरपूर है। इसका उपयोग दलिया, पुलाव और अन्य व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।
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कोदो (कोदो); यह एक पोषक तत्वों से भरपूर मिलेट है जिसका उपयोग दलिया, उपमा और अन्य व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।
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सांवा (सांवा); यह सूखा-सहनशील मिलेट है जिसका उपयोग दलिया, खिचड़ी और अन्य व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।
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चेना (चेना); यह एक तेजी से बढ़ने वाला और सूखा-सहनशील मिलेट है जिसका उपयोग दलिया और अन्य व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।
भारत में मिलेट कहाँ उगाया जाता है?
भारत के कई हिस्सों में मिलेट उगाया जाता है और यह लाखों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मुख्य भोजन है। निम्नलिखित भारत के कुछ प्रमुख मिलेट उगाने वाले क्षेत्र हैं:
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महाराष्ट्र
महाराष्ट्र भारत के अग्रणी मिलेट उत्पादक राज्यों में से एक है। यह देश में सबसे बड़ा बाजरा (pearl millet) उत्पादक है और साथ ही ज्वार (sorghum) तथा रागी (finger millet) जैसे अन्य मिलेट्स भी उगाता है। -
कर्नाटक
कर्नाटक भारत का एक अन्य प्रमुख मिलेट उत्पादक राज्य है, जहाँ सबसे अधिक रागी (finger millet) उगाई जाती है। राज्य में कंगनी (foxtail millet) और बाजरा (pearl millet) जैसे अन्य मिलेट्स भी उगाए जाते हैं। -
तमिलनाडु
तमिलनाडु अपने पारंपरिक व्यंजनों के लिए जाना जाता है जिनमें विभिन्न प्रकार के मिलेट्स उपयोग होते हैं। राज्य में सबसे अधिक रागी (finger millet) उगाई जाती है, लेकिन कुटकी (little millet) और बाजरा (pearl millet) जैसे अन्य मिलेट्स भी उगाए जाते हैं। -
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
ये राज्य बाजरा (pearl millet) और ज्वार (sorghum) के प्रमुख उत्पादक हैं। इन राज्यों के कुछ हिस्सों में रागी (finger millet) भी उगाई जाती है। -
राजस्थान
राजस्थान भारत में मिलेट्स का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, जहाँ सबसे अधिक बाजरा (pearl millet) उगाया जाता है। राज्य में ज्वार (sorghum) और रागी (finger millet) जैसे अन्य मिलेट्स भी उगाए जाते हैं। -
गुजरात
गुजरात ज्वार (sorghum), बाजरा (pearl millet) और रागी (finger millet) के उत्पादन के लिए जाना जाता है। -
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश बाजरा (pearl millet) का एक प्रमुख उत्पादक है, और राज्य के कुछ हिस्सों में रागी (finger millet) और कंगनी (foxtail millet) जैसे अन्य मिलेट्स भी उगाए जाते हैं।
ये भारत के कुछ प्रमुख मिलेट उगाने वाले क्षेत्र हैं, लेकिन मिलेट्स देश के अन्य हिस्सों जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में भी उगाए जाते हैं।
भारत में मिलेट्स बढ़ाने के लिए सरकारी उपाय
भारत में मिलेट उत्पादन बढ़ाने के अलावा, भारत सरकार ने देश में मिलेट की खेती और उपभोग को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें से कुछ उपाय इस प्रकार हैं:
नीति उपायों के माध्यम से मिलेट्स को बढ़ावा देना
भारत सरकार ने मिलेट्स की खाद्य और पोषण सुरक्षा में सुधार लाने की क्षमता को पहचाना है और मिलेट्स को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और राष्ट्रीय पोषण रणनीति, 2017 जैसे विभिन्न नीति दस्तावेजों में शामिल किया है। सरकार ने मिलेट्स को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति सहित विभिन्न योजनाओं में भी शामिल किया है।
मिलेट पार्क स्थापित करना
भारत सरकार ने मिलेट की खेती और उपभोग को बढ़ावा देने के लिए कई राज्यों में मिलेट पार्क स्थापित किए हैं। ये पार्क विभिन्न प्रकार के मिलेट्स, उनके पोषण लाभ और मिलेट से बनने वाले विभिन्न मूल्य वर्धित उत्पादों को प्रदर्शित करते हैं।
अनुसंधान और विकास बढ़ाना
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य अनुसंधान संस्थानों ने मिलेट्स पर अपना ध्यान बढ़ाया है और ऐसी नई किस्में विकसित कर रहे हैं जो अधिक उत्पादक, रोग-प्रतिरोधी और बेहतर पोषण गुणों वाली हैं।
जागरूकता और प्रचार
भारत सरकार किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेट्स के लाभों के बारे में शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। सरकार राष्ट्रीय मिलेट्स मेला और अन्य खाद्य उत्सवों जैसे आयोजनों के माध्यम से मिलेट्स का प्रचार भी कर रही है।
उद्यमिता को प्रोत्साहन
सरकार ने किसानों और उद्यमियों को मिलेट्स की खेती और मूल्य वर्धन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न उद्यमिता योजनाएं शुरू की हैं। इसमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टार्ट-अप इंडिया योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं।
कुल मिलाकर, भारत सरकार देश में खाद्य और पोषण सुरक्षा में सुधार और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए मिलेट्स की खेती और उपभोग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय कर रही है।
भारत में सरकारी मिलेट्स के लाभ
भारत में सरकारी मिलेट्स के कई लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं
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पोषण लाभ: मिलेट्स प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों सहित पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन-रहित होते हैं और इनका ग्लाइसेमिक सूचकांक कम होता है, जिससे ये ग्लूटेन असहिष्णुता, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए आदर्श बनते हैं।
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जलवायु लचीलापन: मिलेट सूखा-सहनशील हैं और खराब मिट्टी की स्थितियों में भी उग सकते हैं, जिससे ये जलवायु-लचीली फसल बनते हैं। इन्हें अन्य फसलों की तुलना में कम पानी और इनपुट की आवश्यकता होती है, जिससे ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आदर्श हैं।
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सतत कृषि: मिलेट की खेती सतत कृषि प्रथाओं जैसे फसल चक्र और अंतरफसली को बढ़ावा देती है, जो मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करती है और रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करती है।
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आय सृजन: मिलेट एक बहुउपयोगी फसल है जिसे खाद्य, चारा और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। मिलेट की खेती और मूल्य संवर्धन किसानों और उद्यमियों के लिए आय सृजन के अवसर प्रदान करता है।
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खाद्य सुरक्षा: मिलेट भारत के कई हिस्सों में, विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में, एक मुख्य खाद्य है। मिलेट की खेती और उपभोग को बढ़ावा देना खाद्य और पोषण सुरक्षा में सुधार कर सकता है, विशेष रूप से कमजोर समुदायों के बीच।
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जैव विविधता का संरक्षण: मिलेट आनुवंशिक विविधता का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं, और इनकी खेती को बढ़ावा देना कृषि जैव विविधता के संरक्षन में योगदान कर सकता है।