अंग्रेज़ी प्रश्न 8
प्रश्न; छुटकी के जाने के मुश्किल से दस दिन बाद बड़की बीमार पड़ गई। गाँव के नीम-हकीमों द्वारा दी गई दवाओं के बावजूद उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। वह ठीक होने की आशा में तीर्थ-स्थलों की यात्राएँ करती रही। जब उसने अंततः अपने पति को टेलीफोन पर सूचना दी, तो वह नीचे आया, उसे शहर ले गया जहाँ वह काम करता था और एक जनरल फिजिशियन के पास उसका अपॉइंटमेंट कराया जिसकी न केवल सफल प्रैक्टिस थी, बल्कि वह घर पर भी मरीजों को देखता था।
डॉक्टर ने मरीज़ से उसके लक्षणों के बारे में पूछा, जिस पर बड़की ने कमज़ोर आवाज़ में जवाब दिया, ‘मेरी भूख मर गई है। मुझे हमेशा तेज़ सिरदर्द रहता है। मुझे अनिद्रा और अपच है। कई दिनों से मेरी मल-त्याचार सामान्य नहीं हुई है।’ ‘ज़ुबान बाहर निकालो,’ डॉक्टर ने आदेश दिया। बड़की ने वैसा ही किया। ‘मुँह खोलो।’ बड़की ने फिर आज्ञा मानी। डॉक्टर ने जल्दी से कहा, ‘ठीक है, बस इतना काफी है।’ उसने फिर स्टेथोस्कोप से उसकी धड़कन सुनी और नब्ज़ देखी। ‘उसका पाचन प्रभावित है, जिससे अन्य लक्षण उत्पन्न हो रहे हैं,’ उसने घोषित किया। उसने अपनी फीस ली और एक प्रेस्क्रिप्शन लिखा। उसने कहा कि उसे तीन दिन बाद फिर दिखाना होगा। बड़की का पति उसे दवाएँ खरीदकर गाँव वापस छोड़ गया। यद्यपि बड़की ने नियमित रूप से निर्धारित दवाएँ लीं, तय तीन दिनों बाद भी उसे कोई राहत नहीं मिली। बड़की का पति उसे फिर शहर ले आया। इस बार वह उसे एक स्पेशलिस्ट के पास ले गया जिसने कई सारे टेस्ट करवाए। ‘इन परिणामों में कुछ भी गड़बड़ नहीं मिल रही,’ हैरान स्पेशलिस्ट ने कहा। ‘फिर भी मैं कुछ अन्य दवाएँ लिख देता हूँ। पाँच दिन बाद वापस आना।’ बड़की गुस्से में डॉक्टर के केबिन से बाहर निकल गई और उसका शर्मिंदा पति उसके पीछे दौड़ा। उसने उस पर गुस्से से पलट कर कहा, ‘यह कैसा नकली डॉक्टर है? इसे कुछ पता ही नहीं। शैतान के नाम पर यह मुझे कैसे ठीक करेगा?’ और यह कहकर वह घर लौट आई, गहरी नाराज़गी के साथ। रात को उसने अपने बड़े बेटे से कहा, ‘आगरा में अपने चचेरे भाइयों को फोन लगाओ। मैं अपनी मासी से बात करना चाहती हूँ।’ सिपाही, जो काम से घर लौटा था, ने उत्तर दिया, ‘हैलो, कौन बोल रहा है?’ ‘मैं हूँ… गोलू।’ ‘हाँ, गोलू। बताओ… सब ठीक है?’ ‘सब ठीक है।’ ‘बुढ़ी-माँ ठीक है?’ उसने अपनी माँ के लिए पूछा; सभी बच्चे अपनी दादी को बुढ़ी-माँ या ‘बूढ़ी माँ’ कहकर पुकारते थे। ‘हाँ, वह ठीक हैं। कृपया फोन मासी को दे दो। अम्मी उनसे बात करना चाहती हैं।’ सिपाही ने फोन छुटकी को पकड़ा दिया। ‘घर से कॉल है।’ छुटकी ने फोन झपटा लिया। ‘मैं छुटकी हूँ। कौन बोल रहा है?’ ‘मैं हूँ… बड़की।’ ‘बेवकूफ! मुझसे बात करने की ऐसी जल्दी क्यों पड़ी?’ ‘क्या तुमने लाल किला और ताज महल देखा?’ ‘तड़प-तड़प कर मरना, दरी।’ ‘मैं पहले से ही बहुत बीमार हूँ।’ ‘तुम दम घुटकर मरोगी,’ छुटकी ने बिना दया कहा। ‘क्या तुमने हवाई जहाज़ में बैठा?’ ‘एक शब्द मत बोलना, डायन! मैं भी बीमार हूँ। आगरा का पानी मुझे सूट नहीं करता।’ ‘तुमने मुझे छोड़कर अपने पति के साथ घूमने-फिरने निकल ली। तुम्हें सज़ा मिलनी ही थी, तो मिली!’ ‘तुम पिछले जन्म की राक्षसी है, दरी!’ ‘और दूर से सुरक्षित होकर शेरनी बनने का नाटक कर रही है, कांटेदार जानवर! अगर हिम्मत है, और तू किसी खून-खराबे वाले आदमी की बेटी है, तो गाँव आकर मेरा सामना कर…’ बड़की ने फिर चुनौती दी। ‘दूर से सिपाही की बीवी बनने का नाटक कर रही है!’ ‘मैं दो दिन में वापस आ रही हूँ, दरी… फिर देखना कि मैं तेरी चोटी पकड़कर तुझे घुमाकर सौ गज दूर फेंकती हूँ या नहीं! तब तू जान लेगी कि मैं खून-खराबे वाले आदमी की बेटी हूँ या नहीं!’ गलिवेंटिंग शब्द का इस गद्य में प्रयुक्त अर्थ क्या है?
विकल्प:
A) मेले में जाना
B) थिएटर में जाना
C) आनंद के लिए इधर-उधर घूमना
D) अभद्र
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उत्तर:
सही उत्तर; C
समाधान:
- (c) “तुमने मुझे पीछे छोड़कर अपने पति के साथ गैलिवेंटिंग करने चली गईं। तुम्हें भुगतना पड़ा, इसलिए भुगतो।” गैलिवेंटिंग शब्द का अर्थ है “आनंद या मनोरंजन की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक घूमना।”