अंग्रेज़ी प्रश्न 9
प्रश्न; छुटकी के जाने के बाद मुश्किल से दस दिन बीते थे कि बड़की बीमार पड़ गई। गाँव के झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा दी गई दवाओं के बावजूद उसकी हालत में जरा भी सुधार नहीं हुआ। वह ठीक होने की आशा में तीर्थ-स्थलों की यात्राएँ करती रही। जब आख़िरकार उसने अपने पति को टेलीफोन पर सूचना दी, वह आया, उसे शहर ले गया जहाँ वह काम करता था और एक जनरल फिजिशियन के पास उसकी अपॉइंटमेंट करवाई, जिसकी न केवल सफल प्रैक्टिस थी, बल्कि वह घर पर भी मरीज़ों को देखता था।
डॉक्टर ने मरीज़ से उसके लक्षणों के बारे में पूछा, जिस पर बड़की ने कमज़ोर आवाज़ में उत्तर दिया, ‘मेरी भूख मर गई है। सिर हमेशा फटता रहता है। नींद नहीं आती और पाचन भी खराब है। कई दिनों से मेरी मल-त्याग सामान्य नहीं हुई है।’
‘ज़ुबान बाहर निकालो,’ डॉक्टर ने आदेश दिया। बड़की ने वैसा ही किया। ‘मुँह खोलो।’ बड़की ने फिर आज्ञा मानी। डॉक्टर ने जल्दबाज़ी में कहा, ‘ठीक है, बस।’
फिर उसने स्टेथोस्कोप से उसका दिल सुना और नब्ज़ देखी। ‘उसका पाचन प्रभावित है, जिससे बाकी लक्षण उत्पन्न हो रहे हैं,’ उसने घोषित किया। उसने फीस ली और एक प्रेस्क्रिप्शन लिखा। उसने कहा कि उसे तीन दिन बाद फिर दिखाना होगा।
बड़की का पति दवाएँ खरीदकर उसे वापस गाँव छोड़ आया। यद्यपि बड़की ने नियमित रूप से दवाएँ लीं, तय तीन दिनों बाद भी उसे कोई आराम नहीं मिला।
इस बार उसका पति उसे फिर शहर ले आया। इस बार वह उसे एक स्पेशलिस्ट के पास ले गया, जिसने कई सारे टेस्ट करवाए। ‘इन रिपोर्ट्स में कुछ भी गड़बड़ नहीं है,’ हैरान स्पेशलिस्ट ने कहा। ‘फिर भी मैं कुछ और दवाएँ लिखता हूँ। पाँच दिन बाद वापस आना।’
बड़की झल्लाकर डॉक्टर के केबिन से बाहर निकल गई और उसका शर्मिंदा पति उसके पीछे दौड़ा। उसने गुस्से में उस पर पलटवार किया। ‘ये कैसा झोलाछाप है? इसे कुछ पता ही नहीं। भूत के नाम पर ये मुझे कैसे ठीक करेगा?’ और यह कहकर वह घर लौट आई, गहरी नाराज़गी के साथ।
रात को उसने अपने बड़े बेटे से कहा, ‘आगरा में अपने चचेरे भाइयों को फोन लगाओ। मैं अपनी मासी से बात करना चाहती हूँ।’
सिपाही, जो काम से घर लौटा था, ने फोन उठाया, ‘हैलो, कौन बोल रहा है?’
‘मैं… गोलू।’
‘हाँ गोलू, बोल… सब ठीक है?’
‘सब ठीक है।’
‘बुढ़ी-माँ ठीक है?’ उसने अपनी माँ के लिए पूछा; सभी बच्चे अपनी दादी को बुढ़ी-माँ कहते थे।
‘हाँ, वे ठीक हैं। प्लीज़ फोन मासी को दे दो। अम्मी उनसे बात करना चाहती हैं।’
सिपाही ने फोन छुटकी को दिया। ‘घर से फोन है।’
छुटकी ने फोन झपटा। ‘मैं छुटकी बोल रही हूँ। कौन है?’
‘मैं… बड़की।’
‘कमीनी! अब मुझसे बात करने की क्या जल्दी पड़ी है?’
‘क्या तुमने लाल किला और ताज महल देखा?’
‘तुझे कंकाल बनना पड़े, डरी।’
‘मैं पहले से ही बहुत बीमार हूँ।’
‘तू दम घुट-घुटकर मरेगी,’ छुटकी ने बेरहमी से जवाब दिया।
‘क्या तुमने हवाई जहाज़ में बैठा?’
‘चुप हो जा, डायन! मैं भी बीमार हूँ। आगरा का पानी मुझे सूट नहीं करता।’
‘तू मुझे छोड़कर अपने पति के साथ मौज-मस्ती करने चली गई। तुझे सज़ा मिलनी ही थी, तो भुगत!’
‘तू पिछले जन्म की राक्षसी है, डरी!’
‘और दूर से शेरनी बन रही है, कांटेदार कुल्हाड़ी! अगर हिम्मत है, और तू सचमुच लोहे के आदमी की बेटी है, तो गाँव आकर मेरा सामना कर…’ बड़की ने फिर चुनौती दी। ‘दूर से सिपाही की बीवी बनने का नाटक कर रही है!’
‘मैं दो दिन में आ रही हूँ, डरी… फिर देखना कि तेरी चोटी पकड़कर तुझे सौ गज़ दूर फेंकती हूँ या नहीं! तब पता चलेगा कि मैं लोहे के आदमी की बेटी हूँ या नहीं!’
पैसेज से अनुमान लगाकर बताओ कि किसका पति सिपाही है?
विकल्प:
A) छुटकी
B) बड़की
C) गुज़र में स्पष्ट नहीं किया गया है
D) गुज़र में सिपाही का कोई उल्लेख नहीं है
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उत्तर:
सही उत्तर; A
हल:
- (a) रात को उसने अपने बड़े बेटे से कहा, ‘आगरा में अपने चचेरे भाइयों को फोन करो। मैं अपनी मासी से बात करना चाहती हूँ।’ सिपाही, जो अभी काम से घर आया था, ने जवाब दिया, ‘हैलो, कौन बोल रहा है?’