तार्किक तर्क प्रश्न 4
प्रश्न; निर्देश; निम्नलिखित गद्य को ध्यानपूर्वक पढ़ें और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दें:
सदियों से स्वतंत्र इच्छा और निर्धारणवाद का तर्क चल रहा महान वाद-विवाद रहा है। दार्शनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच यह बहस चल रही है कि कौन-सा विचार सत्य को बनाए रखता है और प्रकृति के नियमों का पालन करता है; निर्धारणवाद या स्वतंत्र इच्छा। स्वतंत्र इच्छा वह अवधारणा है कि हम चेतन मानव होने के नाते उन परिस्थितियों में स्वतंत्र और वास्तविक रूप से अनिर्धारित विकल्प चुनने की क्षमता रखते हैं जहाँ हम ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके विपरीत दृष्टिकोण, निर्धारणवाद, वह धारणा है कि दुनिया की सभी घटनाएँ पिछली घटनाओं के प्रभाव या परिणाम होती हैं। इसलिए, मानवों के मामले में स्वतंत्र इच्छा सबसे अधिक समझदारी भरी है क्योंकि हम अपनी स्वतंत्र इच्छा या चुनने की क्षमता से अवगत हैं और यही हमें नैतिक क्रियाओं और अन्य सभी मानवीय कृत्यों के लिए उत्तरदायी बनाता है। निर्धारणवाद वह धारणा है जो डोमिनो प्रभाव से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है, जैसे ही एक डोमिनो गिरता है अगला गिरेगा और इसी तरह आगे भी। यह मुख्यतः कारण और प्रभाव की घटना से उत्पन्न होता है। यह बंद ब्रह्मांडीय दृष्टिकोण इस बात का अर्थ है कि सब कुछ पूर्वनिर्धारित और पूर्वनियत है, जिससे किसी भी नई चीज़ के अस्तित्व में आने की कोई गुंजाइश नहीं बचती। लेखक के अनुसार स्वतंत्र इच्छा के सकारात्मक प्रभाव के संदर्भ में निष्कर्ष क्या है?
विकल्प:
A) खुला ब्रह्मांडीय दार्शनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
B) मानवों की नैतिक धारणाओं के लिए उत्तरदायी क्रियाएँ
C) ऐसे विकल्पों का परिणाम जिसमें किसी भी चीज़ के लिए कोई स्थान न छोड़ा गया हो
D) अस्तित्व में आने वाली पूर्वनिर्धारित क्रियाएँ
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उत्तर:
सही उत्तर; B
समाधान:
- (b) मनुष्यों के मामले में स्वतंत्र इच्छा सबसे अधिक समझदारी भरी है क्योंकि हम अपनी स्वतंत्र इच्छा या चयन करने की क्षमता से अवगत हैं और यही हमें नैतिक क्रियाओं तथा अन्य सभी मानवीय कार्यों के लिए उत्तरदायी बनाता है।