अंग्रेज़ी प्रश्न 21
प्रश्न; वह आदमी पीड़ा में चीख उठा। वह जानता था कि उसका अंत निकट था। उसे यह दर्द अब ज़्यादा देर तक नहीं सहना पड़ेगा। लेकिन उसे तब तक वह रहस्य छिपाकर रखना था। उसे रखना था। बस थोड़ी देर और।
उसने अपने आप को कड़ा किया और मन ही मन वह मंत्र बार-बार दोहराने लगा। एक मंत्र जिसमें अपार शक्ति थी। एक मंत्र जो उसकी जनजाति—मलयपुत्रों—के लिए पवित्र था;
जय श्री रुद्र… जय परशु राम… जय श्री रुद्र… जय परशु राम।
श्री रुद्र को जय। श्री रामचंद्र को जय।
उसने आँखें बंद कीं, मंत्र पर ध्यान लगाया। अपने वर्तमान वातावरण को भूलने की कोशिश करता हुआ।
मुझे शक्ति दो। हे देवों। मुझे शक्ति दो।
उसका शत्रु उसके ऊपर खड़ा था, एक और घाव लगाने की तैयारी में। लेकिन वह वार कर पाता इससे पहले एक औरत ने उसे ज़ोर से पीछे खींच लिया।
उसने गुस्से से भरी कर्कश आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा, ‘खर, यह काम नहीं कर रहा।’ खर, लंकाई सशस्त्र बलों में एक पलटन कमांडर, अपनी बचपन की प्रेमिका समीची की ओर मुड़ा। कुछ वर्ष पहले तक समीची उत्तर भारत के एक छोटे से राज्य मिथिला की कार्यवाहक प्रधानमंत्री थी। लेकिन उसने अपना पद त्याग दिया था और अब उस व्यक्ति का पता लगाने में लगी थी जिसने उसे नियुक्त किया था। उस राजकुमारी जिसकी वह एक समय सेवा करती थी; सीता।
‘यह मलयपुत्र एक कठोर अखरोट है,’ खर ने फुसफुसाते हुए कहा। ‘वह टूटेगा नहीं। हमें यह जानकारी किसी और तरीके से निकालनी होगी।’
‘समय नहीं है!’
समीची की फुसफुसाहट तीव्रता से कर्कश थी। खर जानता था कि वह सही थी। रैक पर बंधा आदमी अभी उनका सबसे बेहतरीन सूचना स्रोत था। केवल वही बता सकता था कि सीता, उसके पति राम, उसके भाई लक्ष्मण और उनके साथ आए सोलह मलयपुत्र सैनिक कहाँ छिपे हैं। खर यह भी जानता था कि यह जानकारी निकालना कितना ज़रूरी था। यह उनके लिए समीची के असली स्वामी—जिसे वह ईरैव-रावण कहती थी, लंका के राजा—की अच्छी किताबों में वापस आने का मौका था।
‘मैं कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन वह इस तरह ज़्यादा देर तक नहीं टिकेगा,’ खर ने धीमी आवाज़ में कहा, अपनी निराशा छिपाने की कोशिश करता हुआ। ‘मुझे नहीं लगता कि वह बोलेगा।’
‘मुझे कोशिश करने दो।’
खर कुछ कह पाता इससे पहले समीची उस मेज़ की ओर बढ़ी जहाँ मलयपुत्र बेड़ियों में जकड़ा पड़ा था। उसने उसकी धोती झटककर उतारी और एक तरफ फेंक दी। फिर उसने उसकी लंगोट भी खींचकर अलग कर दी, बेचारे आदमी को पूरी तरह नंगा और शर्म से कराहता छोड़ दिया।
खर भी स्तब्ध-सा दिखा। ‘समीची, यह—’
समीची ने उसे तीखी नज़रों से देखा और वह चुप हो गया। यातनाकर्ताओं के भी कुछ नियम होते हैं। कम से कम भारत में। लेकिन समीची को उन्हें तोड़ने में कोई झिझक नहीं थी।
मलयपुत्र की आँखें डर से फैली हुई थीं। जैसे वह आने वाले दर्द को पहले ही महसूस कर रहा हो।
समीची ने पास पड़ी एक हँसिया उठाई। एक ओर वह खतरनाक धारदार थी, दूसरी ओर दाँतेदार।
एक ऐसा क्रूर डिज़ाइन जो अधिकतम पीड़ा पहुँचाने के लिए बनाया गया था। वह यातना रैक की ओर बढ़ी, हाथ में हँसिया लिए। उसने उसे ऊपर उठाया, उसकी धार को महसूस किया, अपनी उँगली से उसे काटकर खून निकाला। ‘तुम बोलोगे। मुझ पर भरोसा करो।
तुम बोलोगे,’ वह दाँतों में दबाकर बोली जैसे हँसिया को मलयपुत्र की टांगों के बीच ले गई। बेहद निकट।
उसने हँसिया को धीरे, जानबूझकर घुमाया। यह नरम त्वचा को काटता हुआ अंदर गया। अंडकोष में गहरा घाव करता हुआ। उस बिंदु पर अधिकतम पीड़ा पहुँचाता हुआ जहाँ तंत्रिकाओं की लगभग सैडिस्टिक सघनता होती है।
मलयपुत्र चीख पड़ा।
वह रोया, वह रुकने की भीख माँगने लगा।
अब वह अपने देवताओं को नहीं पुकार रहा था। यह उनसे परे था। वह अपनी माँ को पुकार रहा था।
खर को तब समझ आया। मलयपुत्र बोलेगा। बस थोड़ा समय की बात है। वह टूटेगा। और बोलेगा।
वह जानता था कि उसका अंत निकट है। उसने दर्द से बचने के लिए क्या किया?
विकल्प:
A) वह भागने की कोशिश करने लगा
B) वह मंत्र जपने लगा
C) वह उस स्त्री को बचाने के लिए इंतज़ार करता रहा
D) वह दर्द को सहने का दृढ़ संकल्प कर लिया
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