कानूनी तर्क प्रश्न 11

प्रश्न; राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आज सुश्री सूर्या शेष मणि द्वारा दायर एक याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा, जिसमें चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाया गया है कि केयर हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ के कारण उनके पति की मृत्यु हुई।

मामला अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री आर. के. अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था।
याचिकाकर्ता सुश्री डी. सूर्या शेष मणि ने एनसीडीआरसी में आरोप लगाया कि हैदराबाद स्थित केयर हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ ने उनके पति को गलत इलाज दिया जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके पति को पीठ दर्द और उल्टी की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके तुरंत बाद उन्हें पेंटा-एसिड और क्लोफर इंजेक्शन दिए गए। दवाएं दिए जाने के बीस मिनट बाद मरीज़ को भारी दिल का दौरा पड़ा और वह गिर पड़े।
याचिकाकर्ता के अनुसार भर्ती होने के समय उन्हें सीने में दर्द, बुखार, बीपी की समस्या नहीं थी और वे डायबेटिक भी नहीं थे। ईसीजी भी सामान्य आया था। दवा दिए जाने के बाद तुरंत कार्डियक डॉक्टर को बुलाया गया और ईसीजी किया गया जिसमें बेहद कम बीपी और लगभग कोई हृदय कार्य नहीं होना बताया गया। बाद में मरीज़ को कार्डियक इंजेक्शन दिया गया और उन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए कैथ लैब, हृदय वार्ड, में रेफर किया गया।
इन सभी बातों को याचिका के रूप में प्रस्तुत करते हुए याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि संभवतः मरीज़ की मृत्यु उससे बहुत पहले हो चुकी थी जब उन्हें अस्पताल से मृत घोषित किया गया क्योंकि अस्पताल ने डिस्चार्ज रिपोर्ट में मरीज़ की मिनट-दर-मिनट जानकारी भी नहीं दी।
प्रतिवादी/अस्पताल ने तर्क दिया कि मरीज़ डायबेटिक थे और पिछले एक वर्ष से अच्छी स्वास्थ्य स्थिति में नहीं थे। याचिकाकर्ता ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और दलील दी कि उनके पति छह महीने पहले दुबई से वापस आए थे जहां उनकी स्वास्थ्य जांच हुई थी और उन्हें फिट पाया गया था।
प्रतिवादी ने पहले मरीज़ की पहचान को लेकर भी संदेह जताया था क्योंकि अस्पताल में ली गई तस्वीर में चेहरा आधार कार्ड की तस्वीर से मेल नहीं खा रहा था, जिसे बाद में उसने कोर्ट के समक्ष वापस ले लिया।
प्रतिवादी ने कोर्ट के समने स्वीकार किया कि वह व्यक्ति की पहचान पर विवाद नहीं कर रहा है लेकिन यह कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उल्लिखित इंजेक्शन हानिकारक नहीं हैं और दिल का दौरा नहीं पड़ा सकते क्योंकि ये एसिडिटी और उल्टी के लक्षणों की जांच के लिए दिए गए थे, जिनसे मरीज़ भर्ती होने के समय पीड़ित थे। प्रतिवादी ने यह भी दलील दी कि मरीज़ तंबाकू सूंघता था और शराब पीता था।
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मामले में आगे कोई तारीख न देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति श्री आर. के. अग्रवाल ने कहा कि फैसला तीन महीने की अवधि के भीतर कभी भी आ सकता है।
याचिकाकर्ता द्वारा क्या शिकायत दायर की गई?

विकल्प:

A) चिकित्सीय लापरवाही

B) चिकित्सीय लापरवाही जिससे मृत्यु हुई

C) चिकित्सा सेवा में देरी जिससे मृत्यु हुई

D) धोखाधड़ी और ठगी

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उत्तर:

सही उत्तर; B

समाधान:

  • (b) राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आज सुश्री सूर्या शेष मणि द्वारा दायर एक याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि केयर हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ की चिकित्सीय लापरवाही के कारण उनके पति की मृत्यु हुई।