कानूनी तर्क प्रश्न 12

प्रश्न; राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आज सुश्री सूर्या शेष मणि द्वारा दायर एक याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि केयर हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ द्वारा चिकित्सकीय लापरवाही के कारण उनके पति की मृत्यु हुई।

मामला अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री आर. के. अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था।
याचिकाकर्ता सुश्री डी. सूर्या शेष मणि ने एनसीडीआरसी में आरोप लगाया कि हैदराबाद स्थित केयर हॉस्पिटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ ने उनके पति को गलत इलाज दिया जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके पति को पीठ दर्द और उल्टी की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके तुरंत बाद उन्हें पेंटा-एसिड और क्लोफर इंजेक्शन दिए गए। दवाएं दिए जाने के बीस मिनट बाद मरीज़ को भारी दिल का दौरा पड़ा और वह गिर पड़े।
याचिकाकर्ता के अनुसार, भर्ती होने के समय उन्हें छाती में दर्द नहीं था, बुखार नहीं था, बीपी की समस्या नहीं थी और वे डायबेटिक भी नहीं थे। ईसीजी भी सामान्य आया था। दवा देने के तुरंत बाद कार्डियक डॉक्टर को बुलाया गया और फिर से ईसीजी किया गया जिसमें बेहद कम बीपी और लगभग कोई हृदय गति नहीं दिखी। बाद में मरीज़ को कार्डियक इंजेक्शन दिया गया और उन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए कैथ लैब, यानी हृदय विभाग, में भेजा गया।
इन सभी तथ्यों को याचिका में प्रस्तुत करते हुए याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि संभवतः मरीज़ की मृत्यु उससे बहुत पहले हो चुकी थी जब तक अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित किया, क्योंकि अस्पताल ने डिस्चार्ज रिपोर्ट में मरीज़ की मिनट-दर-मिनट जानकारी नहीं दी।
प्रतिवादी/अस्पताल ने तर्क दिया कि मरीज़ डायबेटिक थे और पिछले एक वर्ष से स्वास्थ्य ठीक नहीं थे। याचिकाकर्ता ने इस प्रस्तुतिकरण का विरोध किया और दलील दी कि उनके पति छह महीने पहले दुबई से वापस आए थे जहाँ उनकी स्वास्थ्य जांच हुई थी और उन्हें फिट पाया गया था।
प्रतिवादी ने पहले मरीज़ की पहचान को लेकर भी संदेह जताया था क्योंकि अस्पताल में ली गई तस्वीर में चेहरा आधार कार्ड की तस्वीर से मेल नहीं खा रहा था, जिसे बाद में उसने अदालत के समक्ष वापस ले लिया।
प्रतिवादी ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि वह व्यक्ति की पहचान पर विवाद नहीं कर रहा है, लेकिन यह कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उल्लिखित इंजेक्शन हानिकारक नहीं हैं और दिल का दौरा नहीं पड़ा सकते क्योंकि ये उल्टी और एसिडिटी की जांच के लिए दिए गए थे, जिनसे मरीज़ भर्ती होने के समय पीड़ित थे। प्रतिवादी ने यह भी दलील दी कि मरीज़ तंबाकू सूँघता था और शराब पीता था।
दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले पर आगे की तारीख दिए बिना फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति श्री आर. के. अग्रवाल ने कहा कि फैसला किसी भी समय आने वाले तीन महीनों के भीतर हो सकता है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, भर्ती के समय मरीज़ की क्या स्थिति थी?

विकल्प:

A) न तो बीपी और न ही डायबिटीज़

B) केवल सीने में दर्द है, लेकिन न तो बीपी है और न ही डायबिटीज़

C) ईसीजी सामान्य है, लेकिन बीपी ज़्यादा है और डायबिटीज़ नहीं है

D) बीपी और ब्लड शुगर दोनों ज़्यादा हैं, लेकिन सीने में दर्द नहीं है

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उत्तर:

सही उत्तर; A

समाधान:

  • (a) याचिकाकर्ता के अनुसार भर्ती होने के समय उसे सीने में दर्द नहीं था, बुखार नहीं था, बीपी की समस्या नहीं थी और वह डायबिटिक भी नहीं था। रिकॉर्ड किया गया ईसीजी भी सामान्य था।