अंग्रेज़ी प्रश्न 25

प्रश्न; नागेन्द्र नाथ कुण्डा को अपने साथ कलकत्ता ले जाने को अनिच्छा से राज़ी हुए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने उसकी मौसी के पति की खूब तलाश की, पर श्याम बाज़ार में बिनोद घोष नाम का कोई नहीं मिला। उन्हें एक बिनोद दास मिला, जिसने कोई सम्बन्ध स्वीकार नहीं किया। इस प्रकार कुण्डा नागेन्द्र पर बोझ बनकर रह गई।

नागेन्द्र की एक छोटी बहन थी, कमल मणि नाम की, जिसके ससुराल कलकत्ता में थे। उसके पति का नाम श्रीश चन्द्र मित्र था। श्रीश बाबु फेयरली एण्ड कंपनी नाम के बड़े घर में मुनीम थे। यह एक विशाल फर्म थी और श्रीश चन्द्र धनवान थे। वे अपने साले से बहुत लगाव रखते थे। नागेन्द्र कुण्डा नन्दिनी को वहीं ले गए और उसकी कहानी कमल मणि को सुना दी।
कमल की उम्र लगभग अठारह वर्ष थी। रूप-रेखा में वह नागेन्द्र से मिलती-जुलती थी; दोनों भाई-बहन बहुत सुन्दर थे। पर सौन्दर्य के अतिरिक्त कमल अपनी विद्वता के लिए भी प्रसिद्ध थी। नागेन्द्र के पिता ने एक अंग्रेज़ उस्ताद रखकर कमल मणि और सूर्य मुखी को अच्छी तरह पढ़ाया था। कमल की सास जीवित थीं, पर वे श्रीश चन्द्र के पैतृक घर में रहती थीं। कलकत्ता में कमल मणि घर की मालकिन थी।
जब नागेन्द्र ने कुण्डा नन्दिनी की कथा समाप्त की, तो बोले, “यदि तुम उसे यहाँ न रखोगी तो उसके लिए और कोई ठिकाना नहीं। बाद में जब मैं घर लौटूँगा तो उसे गोविन्दपुर अपने साथ ले जाऊँगा।”
कमल बहुत शरारती थी। नागेन्द्र के मुँह फेरते ही उसने कुण्डा को बाँहों में उठाकर दौड़ लगा दी। एक पास के कमरे में गुनगुना पानी भरा टब रखा था, और अचानक कमल ने कुण्डा को उसमें फेंक दिया। कुण्डा बुरी तरह डर गई। तब कमल हँसती हुई सुगन्धित साबुन लेकर उसे धोने लगी। एक सेविका यह देखकर दौड़ी आई, “मैं कर दूँगी! मैं कर दूँगी!” पर कमल ने उस पर गरम पानी छिड़ककर भगा दिया। कमल ने कुण्डा को नहलाकर मल-धुल दिया, तो वह ओस से धुली कमल-कली सी दिखने लगी। फिर कमल ने उसे सुन्दर सफेद वस्त्र पहनाया, सुगन्धित तेल से बाल सँवारे और आभूषणों से सजाकर कहा: “अब जाकर दादा बाबु को प्रणाम कर आ, पर ध्यान रख—घर के मालिक को ऐसे मत दिखना; यदि उसने तुझे देख लिया तो वह तुझसे विवाह करना चाहेगा।”
नागेन्द्र नाथ ने कुण्डा की पूरी कहानी सूर्य मुखी को लिख भेजी। साथ ही अपने एक दूरस्थ अन्तरंग मित्र हरदेव घोषाल को लिखते हुए उसका इस प्रकार उल्लेख किया:
“बताओ, तुम स्त्री के सौन्दर्य की कौन-सी उम्र सबसे अच्छी मानते हो? तुम कहोगे चालीस के बाद, क्योंकि तुम्हारी ब्राह्मणी उससे एक-दो वर्ष बड़ी है। कुण्डा नाम की लड़की, जिसकी कथा मैंने लिखी है, तेरह वर्ष की है। उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो सौन्दर्य की यही उम्र हो। यौवन के खिलने से पहले जो मधुरता और सरलता होती है, वह फिर कभी नहीं दिखती। इस कुण्डा की सरलता अद्भुत है; वह कुछ नहीं समझती। आज तो वह लड़कों के साथ गलियों में खेलने दौड़ी जा रही थी। मना करने पर बुरी तरह डर गई और रुक गई। कमल उसे पढ़ा रही है और कहती है कि वह पढ़ने में तेज़ है, पर दूसरी बातें नहीं समझती। उदाहरण के लिए, उसकी बड़ी-बड़ी नीली आँखें—जो सदा साफ़ पानी में खिलते शरद-कमल की भाँति तैरती रहती हैं—ये दोनों आँखें मेरे चेहरे पर टिकी रह सकती हैं, पर कुछ कहती नहीं। मैं उन्हें देखकर अपने होश खो बैठता हूँ; और अधिक कुछ कह नहीं सकता।”
नागेन्द्र नाथ का अन्तरंग मित्र कौन था?

विकल्प:

A) सूर्य मुखी

B) हर देब घोषाल

C) श्रीश चंद्र मित्र

D) एक अनाम अंग्रेज़ी शिक्षक

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उत्तर:

सही उत्तर; B

समाधान:

  • (b) नगेन्द्र नाथ ने कुंडा का इतिहास सूर्य मुखी को लिखा। साथ ही जब उसने अपने एक दूर रहने वाले घनिष्ठ मित्र हर देब घोषाल को पत्र लिखा, तो उसने कुंडा के बारे में निम्नलिखित शब्दों में बात की।